आज जब निर्मल वर्मा को याद करने के बहाने अपना ओछापन बांचने बैठा, तो फिर एक बार पिताजी से बात की. उन्होंने कहा, तुम समझो कि वह इस जमाने का विशुद्ध साहित्यकार है. उसने खुद को इस या उस विचारधारा में नहीं बंधने दिया.
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